Tuesday, September 25, 2018

Grammar feature writing व्याकरण फीचर लेखन

विद्यार्थियों

आज हम हिंदी व्याकरण - फीचर लेखन करेंगे |

फीचर लेखन के गुण:
1 - विश्वसनीयता
2 - सरसता एवं सहजता
3 - रोचकता एवं संक्षिप्त ता
4 - प्रसंगिकता

5 - प्रचलित शब्दावली का प्रयोग

फीचर लेखन का क्रम:
1 शीर्षक
2 भूमिका  
3 विषय का विस्तार  
4 निष्कर्ष या समापन

फीचर  लेखन कोनी मलिक श्रेणियों में बांटा जा सकता है -
- सामाजिक सांस्कृतिक
- साहित्यिक  फीचर
- प्राकृतिक फीचर
- घटनापरक फीचर
- राजनीतिक फीचर

कुछ महत्वपूर्ण फीचर के उदाहरण -

1. स्वच्छता अभियान पर एक फीचर लिखिए | 
                     
स्वच्छता अभियान
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर
आरंभ किया गया स्वच्छ भारत अभियान अब तक सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है |
गांधी जी के आवाहन को पूरा करने वाले देश अब उनके लिए क्लीन इंडिया के आह्वान
को पूरा करने निकल पड़ा | देश को स्वच्छ बनाना सिर्फ किसी सरकार या संगठन की
जिम्मेदारी नहीं हो सकती हो नहीं संभव भी नहीं है | जब तक देश के नागरिक इसके
प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक इस महान लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है |
स्वच्छता की भावना हमारे अंदर होनी चाहिए बल्कि हमें स्वयं ही इसके प्रति आंतरिक
स्तर पर सचेत होना होगा | ना तो गंदगी फैलाएं और ना ही किसी को गंदगी फैलाने
दे यही भावना स्वस्थ अभियान को सफल एवं सार्थक बना सकती है | हमें स्वच्छता
के महत्व को समझना चाहिए इसके अभाव में यानी गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों को
भी जाना होगा विश्व पटल पर अपनी गंदगी की छवि को मिटाकर अपनी स्वच्छता
प्रिया छवि को स्थापित करना होगा और इस स्वच्छता अभियान को सफल बनाना होगा |

2. वन रहेंगे- हम रहेंगे पर एक फीचर लिखिए |

वन रहेंगे : हम रहेंगे
पिछले सैकड़ों वर्षों से वृक्ष कट रहे हैं जंगलों का सफाया हो रहा है | मनुष्य ने ठान
लिया कि हम ही रहेंगे चाहे जंगल रहे या ना रहे यदि जंगल रहे तो हम कहां रहेंगे |
जंगल सिकुड़ कर छोटे होते जा रहे हैं | नगर फल-फूल कर बड़े होते जा रहे हैं | मनुष्य
और प्रकृति में गहरा संबंध रहा है | मानव अपनी सभी अवस्थाओं की पूर्ति के लिए
पूर्णता प्रकृति पर ही निर्भर है | वन संपदा भी प्रकृति की एक अद्भुत और अत्यंत उपयोगी
है | वन तथा पेड़ पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  लेकर उसे प्राण दायिनी
ऑक्सीजन में बदल देते हैं | वृक्षों का प्रत्येक अंग - फल, फूल, पत्तियां, छाल यहां तक
की जड़ भी उपयोगी है | हमें स्वादिष्ट फलों के साथ साथ जीवन रक्षक औषधियां भी
मिलती हैं | वन बादलों को रोककर वर्षा कराने में भी सहायता करते हैं | पर्यावरण को
भी शुद्ध करते हैं वनों से प्राप्त लकड़ियां भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने का काम करती
हैं | वनों से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं | फिर भी मनुष्य ने अंधाधुंध वृक्षों की
कटाई की है | जिसके कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गए हैं | अचानक मौसम परिवर्तन
हो जाता है | जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं | पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
होने लग गई है | हिमनदो का पिघलना समुद्री जल- अति में वृद्धि अनेक समस्याओं को
उत्पन्न हो गई है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास के लिए वन संपदा
का प्रयोग करता है | इसलिए हमें यह बात समझनी होगी कि विकास और पर्यावरण
एक दूसरे के विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक हैं | यदि वृक्ष न रहे तो संपूर्ण मानव जगत
का अस्तित्व ही मिट जाएगा | यह भी सही है कि विकास के लिए वृक्ष काटना आवश्यक
है | इसके लिए हमें वृक्षारोपण को अपना कर्तव्य समझ इसका पालन करना चाहिए इसके
साथ ही हमें सतत पोषणीय विकास की विचारधारा को अपनाना चाहिए |

शुभकामनाएं सहित !

नीलम


Friday, September 21, 2018

Aroh Chapter 3 Poetry आरोह अध्याय तीसरा काव्य भाग

विद्यार्थियों

आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे - पथिक (कवि रामनरेश त्रिपाठी)


प्रश्न- पथिक का मन कहां विचरना चाहता है ?
उत्तर -  
पथिक प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत है | प्रतिक्षण नूतन  वेश धारण करने वाली बादलों की
पंक्ति को तथा नीले समंदर की लहरों को देखकर वह  मुग्ध हो रहा है | पथिक का मन
नीले अकाश और नीले समुद्र के बीच विचार ना चाहता है | उसका मन चाहता है कि वह
बादलों पर बैठकर आकाश के बीच विचरण करें और प्रकृति के समस्त सौंदर्य का अनुभव
करें |

प्रश्न- सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के  बिंबो का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर -  
सुबह के सूरज की लालिमा जब समुद्र तल पर पड़ती है | तो चारों तरफ लालिमा बिखरती
हैं | कवि ने कल्पना की है कि मानो लक्ष्मी का मंदिर है और लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई
गई सुनहरी सड़क है | कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उसमंदिर का उज्जवल कअंगूरा
है और लक्ष्मी की सवारी को इस पुण्य धरती पर उतारने के लिए स्वयं समुद्र देव ने बहुत
सुंदर स्वर्णिम मार्ग बना दिया हो | कवि की कल्पना  बहुत ही सुंदर तरीके से बिंबो के रूप
में उभरकर आई है |

प्रश्न- पथिक कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है ऐसे
उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें?
उत्तर -  
श्री राम नरेश त्रिपाठी आधुनिक युग के कवियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | त्रिपाठी
जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार थे | प्राकृतिक प्रेम और नवीनता के प्रति आग्रह भी उनके
काव्य की प्रमुख विशेषता रही है | पथिक कविता में भी प्रकृति  के उपादान ओं को मानव
की भांति करते हुए दिखाया है | जिससे कविता के सौंदर्य अभिवृद्धि हुई है | सूर्य के सामने
बादलों का नाचना कभी श्वेत श्याम नील वर्ण को धारण करना गहरे अंधेरे का मानवीकरण
किया है आधी रात को सारे संसार को जो ढक लेता है | अकाश रूपी छत पर तारों को
बिखरा देता है तब इस जगत का स्वामी मंद गति से चलकर आता है | सागर ओं को अपने
मीठे गीत सुनाता है | आधी रात को जब सूर्य निकलने की तैयारी करता है और धीमी धीमी
गति से चलता हुआ सागर के किनारे अपनी लालिमा भी बिखेरता है | और चांद उसके रूप
को देखकर हंस कर वापसी की तैयारी करता है | पेड़ पत्ते फूल मुस्कुराने लगते हैं पक्षी
चहचाहने लगते हैं | वृक्षों को भी सजे धजे प्रसन्न मनुष्य के रूप में दर्शाया है | फूलों को
सुख की सास लेते हुए  प्राणी की भांति दिखाया गया है | इस तरह इस कविता में कई
स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है |


शुभकामनाएं सहित !


नीलम