Saturday, October 13, 2018

Aroh Chapter 5 Poetry आरोह अध्याय पांचवा काव्य भाग

विद्यार्थियों

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे - घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)

प्रश्न - पानी के रात भर गिरने और प्राण मन के गिरने से परस्पर क्या संबंध है ?
उत्तर -
राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए कवि भवानी प्रसाद मिश्र को भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत
जेल यात्रा की यात्रा यातना सहनी पड़ी | यह कविता जब वह जेल में थे | तब उन्होंने लिखी
बहुत वर्षा हो रही है | रात भर वर्षा होने से कवि को अपने घर की याद आ गई घर के सदस्य
के साथ हंसी खेल करते हुए मनोरम दिन ज्यादा गए जिस प्रकार मेघा अकाश से गिरकर
वर्षा ला रहे हैं | उसी तरह कवि का मन यहां परिवार की स्मृतियों से गिरा हुआ है | जैसे जैसे
पानी रात भर लगातार गिरता जा रहा है वैसे-वैसे कवि के लिए में भी अपने परिजनों की
स्मृतियां चलचित्र बनकर निरंतर बढ़ती जा रही है |

प्रश्न - मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है ?
उत्तर -  
कवि सोच रहा है कि उसकी बहन मायके में अनंत खुशियां बांटने आई होगी | सोचा होगा
कि पिता के घर जाकर अपने भाइयों बहनों से मिलूंगी परंतु वहां जाकर उसे पता चला
होगा कि उसका एक भाई जेल में है | उसकी वही खुशियां दुख में बदल जाएंगी | वही
घर उसके लिए दुखों का घर बन गया होगा | इसी कारण बाप के घर को (परिताप का
घर) कहा है |

प्रश्न - पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?
उत्तर -
भवानी प्रसाद मिश्र के पिता की निम्नलिखित विशेषताओं को कार आ गया है -
i) बलिष्ठ शरीर और साहसी   कवि ने अपने पिता का विशालकाय और मजबूत
शरीर और साहसी व्यक्ति दर्शाया है | कभी कहते हैं कि उनके पिता पर बुढ़ापे का कोई
लक्षण दिखाई नहीं देता | वह अभी भी पूरी क्षमता के साथ दौड़ सकते हैं | खिल खिला
सकते हैं | साहस  तो उनमे इतना है कि वह अपने सामने शेर तो क्या मौत को देखकर
भी ना डरे | उनकी आवाज में बादलों जैसी गर्जन है | काम भी तूफान की तरह तेजी से
करते हैं |
ii) धार्मिक प्रवृत्ति - वह सुबह उठकर घर की छत पर जाकर व्यायाम करते हैं |
मुगलद भी जानते हैं | दंड बैठक निकालते हैं | और साथ में गीता का पाठ भी करते हैं |
यह उनकी एक धार्मिक प्रवृत्ति का उदाहरण है |
iii) कोमल हृदय - भवानी प्रसाद मिश्र के पिता मन से भी विशाल और उदार हैं | वह
अत्यंत सरल, भोले, सहृदय और  भावुक है | अपने परिवार जनों से वह गहरा लगाव
रखते हैं | उन के 5 पुत्र है वह सबसे गहरे जुड़े हुए हैं और कवि से उनका विशेष लगाव है |

प्रश्न - निम्नलिखित पंक्तियों में बस शब्द के प्रयोग की विशेषताएं बताइए?
मैं मजे में हूं सही है,
घर नहीं हूं बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब वीरस है |  
उत्तर -
यहां बस शब्द का प्रयोग विशिष्ट है बस शब्द तीन बार प्रयोग किया गया है |
परंतु तीनों बस का अर्थ अलग अलग है | एक बस का विविध प्रकार से अर्थ है | पहले
बस में कवि अपने पिता और परिवार जनों को सांत्वना दे रहा है | केवल मामूली सी बात
है कि मैं घर पर नहीं हूं बस यहां जेल में हूं | दूसरी बार बस शब्द में केवल कवि के मन
की व्याकुलता और पीड़ा का अनुभव होता है | वास्तविकता यही है कि वह घर से दूर है
कि उसकी सहनशक्ति कि मानो चरम सीमा हो गई है | अंतिम बस द्वारा कवि थोड़ा
आशावादी भी है कवि की विभिन्न स्थितियों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है | वैसे तो
जेल में मैं मजे से हूं लेकिन घर के लोग लोगों की खुशियों से मैं वंचित हूं यहां बस
निराशावादी चित्रण दे रहा है |

प्रश्न - कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कभी अपनी
किस स्थिति मन: स्थिति को अपने परिजनों से छुपाना चाहता है?
उत्तर -
कवि जेल में है | उसे घर की याद सताती है | बहुत तेज बारिश हो रही है तो वह सावन
को संबोधित करते हुए अपने आप से ही बातें कर रहा है | घर को याद कर रहा है | घर के
लोगों के वियोग से पीड़ित है |  दूसरे सभी लोगों से उसे डर लग रहा है | कहता है कि मैं
आदमी से भी डरने लग गया हूं जेल की यातनाएं सह रहा हूं | शरीर और मन ढलने लगा है |
रात रात भर जागता रहता हूं और चुप रहने लगा हूं | जेल में रहकर अपना अस्तित्व ही भूल
गया हूं | अपनी वास्तविकता छिपाकर सावन के माध्यम से अपने घर में खुशियों के संदेश
भिजवाता हूं | यहां कवि की मन की स्थिति दीवानों जैसी हो गई हैअर्थात उसे घर की याद
आ रही है |  

शुभकामनाएं सहित !

नीलम

Wednesday, October 10, 2018

Aroh Chapter 4 Poetry आरोह अध्याय चौथा काव्य भाग

विद्यार्थियों

आज हम आरोह पुस्तिका काव्य भाग का चौथा अध्याय करेंगे - वे आंखें (सुमित्रानंदन पंत)


प्रश्न -कविता भी आंखें में किसान की पीड़ा के लिए किसे जिम्मेदार बताया गया है?
उत्तर -
किसान की पीड़ा के लिए जमीदार और महाजन तथा क्रूर कोतवाल को जिम्मेदार ठहराया
गया है | महाजन ने अपना ब्याज और ऋण वसूलने के लिए उसके खेत, बैल और घरबार
बिकवा दिया | जमीदार के  कार् कूनो ने किसान के जवान बेटे को पीट-पीटकर मार दिया |
किसान इतना पैसों का मोहताज हो गया कीलाचार किसान अपनी पत्नी की दवा दारू ना
करा सका और वह भी चल बसी | और उसकी दूध मूही बच्ची का भी देहांत हो गया |
किसान की  पुत्रवधू पर भी कोतवाल ने कू दृष्टि डाली | वह भी कुएं में डूब कर मर गई |
समाज को अन् प्रदान करने वाले कृषक से सारा संसार किनारा कर तमाशा देखता रहा |
किसान अकेला ही पीड़ा को सहता रहा और भीतर ही भीतर घुटता रहा |

प्रश्न - पिछले सुख की स्मृति आंखों में क्षणभर एक चमक है लाती | इसमें किसान के
किन पिछले सुखों की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर -
वे आंखें कविता में सुमित्रानंदन पंत जी ने किसान के पिछले सुखों की ओर संकेत किया
है | किसान के कवि लहराते हरे भरे खेत  थे | जिन की हरियाली को देखकर उसका तन मन
प्रसन्न हो जाता था | तब वह स्वाधीनता उसी से उसका मस्तक ऊंचा उठता था | घर में बैलों
की जोड़ी थी | दूध देने वाली गाय थी |जो किसान से इतना प्रेम करती थी कि वह किसान
को ही अपना  दूध दोहने देती थी | किसान का भरा पूरा परिवार था | एक जवान बेटा और
बहू थी | किसान की देखभाल करने वाली उसकी अपनी पत्नी थी | वह सुख और समृद्धि से
सुख पूर्वक अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहा था | परंतु सब कुछ शोषक वर्ग
की भेंट चढ़ गया था | यह उपरोक्त खुशियां, सुख की स्मृतियां किसान की आंखों में क्षण
भर के लिए चमक ला देती थ |

प्रश्न - किसान की  विरान आंखें नॉक सदृश बन जाती हैं क्यों ?
उत्तर -
किसान बहुत खुश और धन-धान्य से भरपूर अपने परिवार में बहुत खुश था | लेकिन आज
उसकी दुर्दशा जो है उसे अपनी विवशता और असहायता पर रोना आता है | वह महाजन
का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता | यह सोच कर उसकी आंखें नम हो जाती है | कोतवाल
पर उसका जोर नहीं चलता |जमीदार के दुख वह सहता गया | यह सभी बातें उसकी आंखें
तीर के समान नुकीली हो जाती है औरऐसा लगता है मानो वह अत्याचारों की छाती को भेद
डालेगी |

प्रश्न - संदर्भ सहित आश्य स्पष्ट करें :
क - ऊजरी उसके सिवा किसे कब
       पास दुहाने आने देती?
ख - घर में विधवा रही पतोहू
       लक्ष्मी थी, यद्यपि पति घातिन
उत्तर -
क - आंखें कविता में किसान के पास एक श्वेत गाय थी | जिसका नाम ऊजरी था |
जिसे वह बहुत प्रेम करता था | महाजन ने ब्याज की कोड़ी कोड़ी वसूलने के लिए किसान
की बैलों की जोड़ी तथा गाय को नीलाम कर दिया | किसान को अपनी गाय की बहुत याद
आ रही थी कि दूध  दुहाने के लिए किसान  के अतिरिक्त किसी को पास नहीं आने देती थी |
आज सबकुछ उससे छीन गया |

ख- उपरोक्त  पंक्तियां  महाजन के कारकूनो  किसान के जवान पुत्र को मार डाला |
इसी कारण उसकी पुत्रवधू विधवा हो गई | उसकी इसी  स्थिति का चित्रण करते हुए कवि
कहता है की किसान का पुत्र नहीं रहा | उसके उसके पीछे उसकी विधवा पुत्रवधू रह गई जो
कहने का तो नाम से लक्ष्मी थी | परंतु वह पति को खाने वाली थी | कवि ने इन पंक्तियों में
समाज में विधवाओं के प्रति अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण को व्यक्त किया है | कोई कसूर
ना होते हुए भी किसान की पुत्रवधू को पति घातिन होने का कलंक सहना पड़ रहा है |

शुभकामनाएं सहित !

नीलम

Tuesday, September 25, 2018

Grammar feature writing व्याकरण फीचर लेखन

विद्यार्थियों

आज हम हिंदी व्याकरण - फीचर लेखन करेंगे |

फीचर लेखन के गुण:
1 - विश्वसनीयता
2 - सरसता एवं सहजता
3 - रोचकता एवं संक्षिप्त ता
4 - प्रसंगिकता

5 - प्रचलित शब्दावली का प्रयोग

फीचर लेखन का क्रम:
1 शीर्षक
2 भूमिका  
3 विषय का विस्तार  
4 निष्कर्ष या समापन

फीचर  लेखन कोनी मलिक श्रेणियों में बांटा जा सकता है -
- सामाजिक सांस्कृतिक
- साहित्यिक  फीचर
- प्राकृतिक फीचर
- घटनापरक फीचर
- राजनीतिक फीचर

कुछ महत्वपूर्ण फीचर के उदाहरण -

1. स्वच्छता अभियान पर एक फीचर लिखिए | 
                     
स्वच्छता अभियान
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर
आरंभ किया गया स्वच्छ भारत अभियान अब तक सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है |
गांधी जी के आवाहन को पूरा करने वाले देश अब उनके लिए क्लीन इंडिया के आह्वान
को पूरा करने निकल पड़ा | देश को स्वच्छ बनाना सिर्फ किसी सरकार या संगठन की
जिम्मेदारी नहीं हो सकती हो नहीं संभव भी नहीं है | जब तक देश के नागरिक इसके
प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक इस महान लक्ष्य को प्राप्त करना संभव नहीं है |
स्वच्छता की भावना हमारे अंदर होनी चाहिए बल्कि हमें स्वयं ही इसके प्रति आंतरिक
स्तर पर सचेत होना होगा | ना तो गंदगी फैलाएं और ना ही किसी को गंदगी फैलाने
दे यही भावना स्वस्थ अभियान को सफल एवं सार्थक बना सकती है | हमें स्वच्छता
के महत्व को समझना चाहिए इसके अभाव में यानी गंदगी से होने वाले दुष्प्रभावों को
भी जाना होगा विश्व पटल पर अपनी गंदगी की छवि को मिटाकर अपनी स्वच्छता
प्रिया छवि को स्थापित करना होगा और इस स्वच्छता अभियान को सफल बनाना होगा |

2. वन रहेंगे- हम रहेंगे पर एक फीचर लिखिए |

वन रहेंगे : हम रहेंगे
पिछले सैकड़ों वर्षों से वृक्ष कट रहे हैं जंगलों का सफाया हो रहा है | मनुष्य ने ठान
लिया कि हम ही रहेंगे चाहे जंगल रहे या ना रहे यदि जंगल रहे तो हम कहां रहेंगे |
जंगल सिकुड़ कर छोटे होते जा रहे हैं | नगर फल-फूल कर बड़े होते जा रहे हैं | मनुष्य
और प्रकृति में गहरा संबंध रहा है | मानव अपनी सभी अवस्थाओं की पूर्ति के लिए
पूर्णता प्रकृति पर ही निर्भर है | वन संपदा भी प्रकृति की एक अद्भुत और अत्यंत उपयोगी
है | वन तथा पेड़ पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  लेकर उसे प्राण दायिनी
ऑक्सीजन में बदल देते हैं | वृक्षों का प्रत्येक अंग - फल, फूल, पत्तियां, छाल यहां तक
की जड़ भी उपयोगी है | हमें स्वादिष्ट फलों के साथ साथ जीवन रक्षक औषधियां भी
मिलती हैं | वन बादलों को रोककर वर्षा कराने में भी सहायता करते हैं | पर्यावरण को
भी शुद्ध करते हैं वनों से प्राप्त लकड़ियां भवन निर्माण और फर्नीचर बनाने का काम करती
हैं | वनों से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं | फिर भी मनुष्य ने अंधाधुंध वृक्षों की
कटाई की है | जिसके कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गए हैं | अचानक मौसम परिवर्तन
हो जाता है | जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं | पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
होने लग गई है | हिमनदो का पिघलना समुद्री जल- अति में वृद्धि अनेक समस्याओं को
उत्पन्न हो गई है मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विकास के लिए वन संपदा
का प्रयोग करता है | इसलिए हमें यह बात समझनी होगी कि विकास और पर्यावरण
एक दूसरे के विरोधी नहीं एक दूसरे के पूरक हैं | यदि वृक्ष न रहे तो संपूर्ण मानव जगत
का अस्तित्व ही मिट जाएगा | यह भी सही है कि विकास के लिए वृक्ष काटना आवश्यक
है | इसके लिए हमें वृक्षारोपण को अपना कर्तव्य समझ इसका पालन करना चाहिए इसके
साथ ही हमें सतत पोषणीय विकास की विचारधारा को अपनाना चाहिए |

शुभकामनाएं सहित !

नीलम


Friday, September 21, 2018

Aroh Chapter 3 Poetry आरोह अध्याय तीसरा काव्य भाग

विद्यार्थियों

आज हम आरोह पुस्तिका का तीसरा अध्याय करेंगे - पथिक (कवि रामनरेश त्रिपाठी)


प्रश्न- पथिक का मन कहां विचरना चाहता है ?
उत्तर -  
पथिक प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत है | प्रतिक्षण नूतन  वेश धारण करने वाली बादलों की
पंक्ति को तथा नीले समंदर की लहरों को देखकर वह  मुग्ध हो रहा है | पथिक का मन
नीले अकाश और नीले समुद्र के बीच विचार ना चाहता है | उसका मन चाहता है कि वह
बादलों पर बैठकर आकाश के बीच विचरण करें और प्रकृति के समस्त सौंदर्य का अनुभव
करें |

प्रश्न- सूर्योदय वर्णन के लिए किस तरह के  बिंबो का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर -  
सुबह के सूरज की लालिमा जब समुद्र तल पर पड़ती है | तो चारों तरफ लालिमा बिखरती
हैं | कवि ने कल्पना की है कि मानो लक्ष्मी का मंदिर है और लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई
गई सुनहरी सड़क है | कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि सूर्य उसमंदिर का उज्जवल कअंगूरा
है और लक्ष्मी की सवारी को इस पुण्य धरती पर उतारने के लिए स्वयं समुद्र देव ने बहुत
सुंदर स्वर्णिम मार्ग बना दिया हो | कवि की कल्पना  बहुत ही सुंदर तरीके से बिंबो के रूप
में उभरकर आई है |

प्रश्न- पथिक कविता में कई स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में देखा गया है ऐसे
उदाहरणों का भाव स्पष्ट करते हुए लिखें?
उत्तर -  
श्री राम नरेश त्रिपाठी आधुनिक युग के कवियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं | त्रिपाठी
जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार थे | प्राकृतिक प्रेम और नवीनता के प्रति आग्रह भी उनके
काव्य की प्रमुख विशेषता रही है | पथिक कविता में भी प्रकृति  के उपादान ओं को मानव
की भांति करते हुए दिखाया है | जिससे कविता के सौंदर्य अभिवृद्धि हुई है | सूर्य के सामने
बादलों का नाचना कभी श्वेत श्याम नील वर्ण को धारण करना गहरे अंधेरे का मानवीकरण
किया है आधी रात को सारे संसार को जो ढक लेता है | अकाश रूपी छत पर तारों को
बिखरा देता है तब इस जगत का स्वामी मंद गति से चलकर आता है | सागर ओं को अपने
मीठे गीत सुनाता है | आधी रात को जब सूर्य निकलने की तैयारी करता है और धीमी धीमी
गति से चलता हुआ सागर के किनारे अपनी लालिमा भी बिखेरता है | और चांद उसके रूप
को देखकर हंस कर वापसी की तैयारी करता है | पेड़ पत्ते फूल मुस्कुराने लगते हैं पक्षी
चहचाहने लगते हैं | वृक्षों को भी सजे धजे प्रसन्न मनुष्य के रूप में दर्शाया है | फूलों को
सुख की सास लेते हुए  प्राणी की भांति दिखाया गया है | इस तरह इस कविता में कई
स्थानों पर प्रकृति को मनुष्य के रूप में दर्शाया गया है |


शुभकामनाएं सहित !


नीलम

Friday, August 24, 2018

Grammar mass communication व्याकरण जनसंचार की विधाएं

विद्यार्थियों

जनसंचार को समझने के लिए संचार के स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है |

प्रश्न -  संचार क्या है?
उत्तर -
मनुष्य सामाजिक प्राणी है सामाजिक प्राणी होने के कारण वह संचार करता है | संचार का मतलब
विचरण करना | दैनिक जीवन में संचार के बिना हम जीवित नहीं रह सकते | क्योंकि मनुष्य जब
तक जीवित है | संचार अर्थात विचरण करता रहेगा | हम यह भी कह सकते हैं कि समाचार जीवन
की निशानी है | हम जिस संचार की बात कर रहे हैं | उसका अर्थ है मानव के संदेशों को पहुंचाना
अर्थात संदेश भेजना प्राप्त करना इसके दो अनिवार्य लक्षण है |
1. दो या दो से अधिक व्यक्ति
2. उनके बीच किसी संदेश का ग्रहण होना या संप्रेषण होना |
संचार जो है अनुभवों की साझेदारी है | संचार की परिभाषा इस प्रकार हम कह सकते हैं | सूचनाओं
विचारों और भावनाओं को लिखित, मौखिक या दृश्य- श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक एक
जगह से दूसरी जगह पहुंचाना ही संचार है |

प्रश्न - संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?
उत्तर -
वह साधन हमारे संदेश को पहुंचाते हैं  जैसे समाचार पत्र, फिल्म, टेलीफोन रेडियो, दूरदर्शन,
इंटरनेट, सिनेमा और फक्स आदि |


प्रश्न - संचार की प्रक्रिया के तत्व कौन कौन से हैं ?
उत्तर -
संचार की प्रक्रिया के निम्नलिखित तत्व है |
- संचारक या स्त्रोत
- संदेश का कुटीकरण
- संदेश का  कूटवाचन
- प्राप्तकर्ता

प्रश्न - संचार के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए ?
उत्तर -
संचार के निम्न प्रकार है |
- सांकेतिक संचार
- मौखिक संचार
- समूह संचार
- अंत: र्वैयक्तिक  संचार
- जनसंचार

प्रश्न - फीडबैक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
कुट्टी कृत संदेश के पहुंचने पर प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया करता है |
इससे पता चलता कि संचारक का संदेश प्राप्त करता तक पहुंच गया |

प्रश्न - एनकोडिंग या कुटीकरण का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर -
संदेश को भेजने के लिए शब्दों संकेतों या ध्वनि चित्रों का उपयोग किया जाता है | भाषा भी
एक प्रकार का कोट चिन्ह या कोड  होता है | अतः प्राप्तकर्ता को समझाने योग्य कुटों में
संदेश को बांधना एनकोडिंग या कुटीकरण कहलाता है |

प्रश्न - कूट वाचन या डिकोडिंग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
कुटीकरण की उल्टी प्रक्रिया कूट वाचन कहलाती है | इसके माध्यम से संदेश को प्राप्त करता
कूट चिन्हों में बंधे संदेश समझाता है | इसके लिए आवश्यक है कि प्राप्तकर्ता भी कोड का
वही अर्थ समझता हूं | जो उसे संचारक समझाना चाहता है |

प्रश्न - सांकेतिक संचार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर - सांकेतिक संचार का आर्थिक संकेतों द्वारा संदेश पहुंचाना | मनुष्य का हाथजोड़ना, पांव
छूना, हाथ मिलाना, मुट्ठी कसना, सिग्नल देना, लाल बत्ती होना, हरी बत्ती होना आदि सांकेतिक
संचार है |

प्रश्न - समूह संचार का क्या आशय है?
उत्तर -
एक से अधिक व्यक्तियों से बात करता है  | किसी समूह के सदस्य आपस में विचार विमर्श करते हैं
तो उसे समूह संचार कहते हैं | अध्यापक का कक्षा में पढ़ाना किसी संस्था की बैठक होना, जलसा
या जुलूस  मैं वार्तालाप कोई एक व्यक्ति बात करता है और वह सबके लिए करता है | वह सामूहिक
मुद्दों पर की गई वार्ता समूह संचार के अंतर्गत ही आती है |

प्रश्न - जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर -
जनसंचार नहीं सभ्यता का शब्द है जब संचार किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज
के विशाल वर्ग से संवाद करने की कोशिश की जाती है तो उसे जनसंचार कहते हैं | इसमें एक संदेश
को यांत्रिक माध्यम के जरिए बहुगुणित किया जाता है | ताकि उसे अधिक से अधिक लोगों तक
पहुंचाया जा सके |

जनसंचार की प्रमुख विशेषताएं -
- जनसंचार माध्यमों के जरिए प्रकाशित या  प्रसारित संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है |
- इसमें संचालक और प्राप्तकर्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता |
- इस माध्यम में अनेक द्वार पाल होते हैं जो इन माध्यमों  से प्रकाशित /प्रसारित होने वाली सामग्री
को नियंत्रण तथा निर्धारित करते हैं |

प्रश्न - जनसंचार माध्यमों में द्वारपालों की भूमिका क्या है ?
उत्तर -
जनसंचार  माध्यमिक में द्वारपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है | यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह
सार्वजनिक हित, पत्रकारिता के सिद्धांतों, मूल्यों और आचार संहिता के अनुसार सामग्री को संपादित
करें तथा इसके बाद ही उनके प्रसारण या प्रकाशन को इजाजत दे |

प्रश्न - जनसंचार के कौन-कौन से कार्य हैं स्पष्ट करें?
उत्तर -
जनसंचार के निम्नलिखित कार्य हैं  |
1. सूचना देना - जनसंचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है यह दुनिया भर से सूचनाएं
प्रसारित करते हैं |
2. मनोरंजन - जनसंचार माध्यम सिनेमा रेडियो-टीवी आदि मनोरंजन के भी प्रमुख साधन है |
3. जागरूकता - यह जनता को शिक्षित करते हैं जनसंचार माध्यम लोगों को जागरूक बनाते हैं |
4. निगरानी - जनसंचार माध्यम सरकार और संस्थाओं के कामकाज पर निगरानी भी रखते हैं |
5. विचार विमर्श के मंच - यह माध्यम लोकतंत्र में विभिन्न विचारों की अभिव्यक्ति का मंच
उपलब्ध कराते हैं इसके जरिए विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुँचाते हैं |

प्रश्न - जनसंचार के माध्यमों को आम जीवन पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर -
जनसंचार माध्यमों का आम जीवन पर बहुत प्रभाव है इनसे सेहत, अध्यात्मक, दैनिक जीवन
की जरूरतें हैं आदि पूरी होने लगी है | यह हमारी जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं |

प्रश्न - लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों का प्रभाव बताइए ?
उत्तर -
लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों में जीवन को गतिशील व पारदर्शी बनाया है | इससे माध्यम में
विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श व  बहस होती है | सूचनाओं में जानकारियों का आदान प्रदान
होता है | जो सरकार की कार्यशैली पर अंकुश रखती है | लोकतंत्र को सशक्त बनाती है |

प्रश्न - जनसंचार के दुष्प्रभाव बताइए?
उत्तर -
1. जनसंचार के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को कम महत्व दिया जाता है |
2.  समाज में अश्लीलता व सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देते हैं |
3.  जनसंचार के माध्यम खास तौर पर TV वेब सिनेमा ने लोगों को काल्पनिक दुनिया की
सैर कराई है | यह आम जनजीवन से दूर हो जाते हैं | यह पलायनवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं |
4. अनावश्यक मुद्दों को उछाला जाता है |
5. कई बार बहुत छोटी बात को बहुत बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है |


शुभकामनाएं सहित !

नीलम